“शिक्षक ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला” — एकलव्य विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस समारोह संपन्न

शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर “गुरुओं के प्रति समर्पण एवं कृतज्ञता” की भावना को केंद्र में रखते हुए एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह में शिक्षक दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन अधिगम एजुकेशन क्लब एवं विश्वविद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं द्वारा किया गया। यह समारोह गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा, शिक्षकों के प्रति श्रद्धा तथा उनके अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता की भावपूर्ण अभिव्यक्ति बन गया। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय की माननीय कुलाधिपति प्रो. सुधा मलैया जी एवं प्रतिकुलाधिपति श्रीमती पूजा मलैया जी के निर्देशन में तथा कुलगुरु डॉ. पवन जैन जी एवं कुलसचिव डॉ. प्रफुल्ल शर्मा जी के मार्गदर्शन में किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के समस्त संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकगण की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना एवं गुरु पूजन के साथ हुआ। ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं वंदना के पश्चात गुरुजनों का पूजन कर उनके प्रति श्रद्धा एवं सम्मान अर्पित किया गया। इसके उपरांत रूपल जैन द्वारा प्रस्तुत स्वागत नृत्य ने समारोह के वातावरण को मनोहारी बना दिया। उनकी प्रस्तुति में भारतीय संस्कृति, नृत्य-कला एवं गुरु के प्रति सम्मान की सुंदर झलक दिखाई दी। समारोह का कुशल संचालन राजी जैन एवं संयम जैन द्वारा किया गया। दोनों ने अपनी प्रभावशाली वाणी एवं सधे हुए संचालन से कार्यक्रम को निरंतर गति प्रदान की। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के समन्वय का दायित्व मनु साहू एवं बृष्टि पाठक ने कुशलतापूर्वक निभाया। लक्ष्मी मिश्रा द्वारा शिक्षक दिवस की महत्ता पर प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें शिक्षक के जीवन में महत्व तथा समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

समारोह में अभियांत्रिकी संकाय के विद्यार्थियों द्वारा मनमोहक समूह नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में आस्था जैन, साक्षी यादव, हर्षिता तिवारी, वैष्णवी सिंह राजपूत, ऋषि गोदरे, अर्थ तरण एवं अनुज पटेल ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विद्यार्थियों की ऊर्जस्वित प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा सभागार करतल ध्वनि से गूँज उठा। इसी क्रम में नर्सिंग संकाय की छात्रा भूमि वंशवर्ती द्वारा एकल नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी गई। उनकी भावपूर्ण एवं आकर्षक प्रस्तुति ने समारोह की सांस्कृतिक गरिमा को और अधिक समृद्ध किया।
कार्यक्रम का सर्वाधिक भावपूर्ण एवं विशेष आकर्षण “गीता उपदेश” पर आधारित नृत्य-नाटिका रही। इसका निर्देशन सहायक प्राध्यापक श्री तपन साहू द्वारा किया गया। नृत्य-नाटिका में रश्मि जैन, आशी विश्वकर्मा, खुशी जैन, वेदांशी दुबे, नीलम, सुमन यादव एवं शालिनी ने प्रभावशाली अभिनय एवं नृत्य के माध्यम से अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
नृत्य-नाटिका के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए कर्म, कर्तव्य एवं जीवन के शाश्वत संदेशों को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। साथ ही गुरु-शिष्य संबंध की महत्ता तथा जीवन में उचित मार्गदर्शन के महत्व को भी कलात्मक रूप से अभिव्यक्त किया गया। प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर कर दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ समारोह में शिक्षकों के लिए विभिन्न मनोरंजक खेलों एवं गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। इन खेलों ने समारोह में एक नई ऊर्जा एवं उल्लास का संचार कर दिया। शिक्षकगण एवं शिक्षिकाओं ने पूरे उत्साह, उमंग और खेल भावना के साथ सहभागिता की। विभिन्न खेलों के दौरान स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एवं आत्मीयता का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।विशेष रूप से अधिकांश मनोरंजक खेलों में शिक्षिकाओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए बाजी मारी। उनकी उत्साहपूर्ण सहभागिता ने समारोह को अत्यंत जीवंत एवं आनंदमय बना दिया। खेलों के दौरान सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों ने तालियों एवं उत्साहवर्धन के माध्यम से अपने गुरुजनों का उत्साह बढ़ाया। इस अवसर पर औपचारिक शैक्षणिक वातावरण कुछ समय के लिए आत्मीय, पारिवारिक एवं उल्लासपूर्ण परिवेश में परिवर्तित हो गया।

समारोह में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. जे.पी. शमा खानम, परीक्षा नियंत्रक डॉ. प्रकाश खमपरिया एवं छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. शैलेंद्र जैन सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और अधिक बढ़ाया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यक्रम समन्वयक डॉ. निधि असाटी का विशेष सहयोग एवं मार्गदर्शन रहा। उन्होंने आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं एवं समन्वय में सक्रिय भूमिका निभाते हुए विद्यार्थियों को निरंतर प्रोत्साहन एवं सहयोग प्रदान किया।

कार्यक्रम के अंत में स्कूल ऑफ़ फार्मेसी के छात्र शिवम विश्वकर्मा द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय के समस्त पदाधिकारियों, गुरुजनों, विद्यार्थियों एवं कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी सहयोगियों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की। अधिगम एजुकेशन क्लब के सभी शिक्षकों और सदस्यों को भी धन्यवाद व्यापित किया

सम्पूर्ण समारोह श्रद्धा, सम्मान, कृतज्ञता, उल्लास एवं सौहार्द से ओत-प्रोत रहा। जहाँ एक ओर विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने गुरुजनों के प्रति उनके सम्मान एवं समर्पण को अभिव्यक्त किया, वहीं मनोरंजक खेलों ने शिक्षक-समुदाय को आनंद और आत्मीयता के सूत्र में बाँध दिया।

इस प्रकार एकलव्य विश्वविद्यालय का शिक्षक दिवस समारोह केवल एक औपचारिक आयोजन न रहकर गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा, ज्ञान के प्रति श्रद्धा, शिक्षक के प्रति कृतज्ञता तथा मानवीय संबंधों की आत्मीयता का जीवंत उत्सव बन गया। समारोह ने यह संदेश पुनः प्रतिध्वनित किया कि शिक्षक केवल ज्ञान का संचारक नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार निर्माण और राष्ट्र निर्माण का सशक्त शिल्पकार है।

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