बुंदेलखण्ड की समृद्ध जैन मूर्तिकला एवं स्थापत्य पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन जैन एवं प्राकृत अध्ययन विभाग, एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह द्वारा भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद्, दिल्ली के सहयोग से किया गया।
इस सम्मेलन में देशभर से पधारे विद्वानों, आचार्यों एवं शोधार्थियों ने जैन कला, प्राचीन मूर्तियों, स्थापत्य शिल्प, अष्टप्रतिहार्यों के अंकन, खजुराहो की मूर्तिकला में नारी चित्रण तथा नवागढ़ एवं कुंडलपुर की ऐतिहासिक धरोहरों पर अपने महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किए।
उद्घाटन से लेकर समापन सत्र तक विभिन्न विद्वानों के व्याख्यानों ने जैन कला की गहराई, उसकी वैज्ञानिकता और सांस्कृतिक महत्व को उजागर किया। सम्मेलन में कई ऐसे नए विषय सामने आए, जिन पर भविष्य में शोध की अपार संभावनाएँ हैं।
यह आयोजन न केवल अकादमिक दृष्टि से समृद्ध रहा, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुआ।
